
Thursday, July 31, 2008
Tuesday, July 29, 2008
वाह रे चुतियापा !
शुरुआत में यह शब्द पढ़कर आपको निराशा हो सकती है। पर आजकल जिंदगी में यही चल रहा है। रोज-रोज की भागदौड़ और बिना बे्रक के नौकरी में शायद एक यही शब्द है चुतियापा, जो रोज-रोज करना होता। लेकिन हर रोज पहले दिन से अलग और उससे कहीं बेहतर। यह सब जरूरी है अगले दिन सकुशल ऑफिस आने के लिए। हो सकता है मेरी तरह दूसरे लोग भी इसे फील करें, लेकिन शायद अब तक लिख न पाए हों। पांच-छह साल तक रोज-रोज वही सिंगल-डीसी, कॉलम-दो कॉलम कर करके कई बार लगता है कि ये क्या कर रहे हैं। जवाब वही चुतियापा! बहुत दिन हो गए, ऑफिस में काम करके सिर इतना पक जाता है कि न ब्लॉग लिखने की हिम्मत होती है न पढ़ने की। पूरा जुलाई बीत गया, एक वीडियो पोस्ट करने के अलावा मैं ब्लॉग के लिए ही समय नहीं दे पाया। कई बार लगता है कि ब्लॉग पर भी चुतियापा शुरू हो गया है। हमारे भाई लोग इतने आ गए हैं, कि शुरुआती दिनों में जो अच्छी अच्छी बातें थी, उनकी जगह आपकी टीका-टिप्पणी और दुकानदारी ने ले ली है। ब्लॉग पर मीडिया की खबरों में जयपुर का नाम आते ही मुझे घूरने लगते हैं। कुछ लोग तो ऐसे हैं जिन्हें यह नहीं पता कि ब्लॉग किस चिडि़या का नाम है। और डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट फलां फलां डॉट कॉम में तेरी फोटो देखी और तू क्या क्या लिखता है टाइप की बात पूछते हुए आ जाते हैं। वो तो शुक्र है कि अब जयपुर में कम से कम 25 ब्लॉगर्स हो गए हैं। खैर ये तो हुआ ब्लॉग न लिखने का कारण आज का चुतियापा यहीं खत्म शुरुआत पर दिल की बातें यूं ही जारी रहेंगीशुक्रिया
Saturday, July 12, 2008
देखिए चीन में ट्रेन की सैर !
मेरे एक दोस्त ने मुझे चीन में ट्रेन के सफर का नायाब वीडियो भेजा था। मुझे लगता है कि आप भारतीयों और भारतीय रेल को पानी पी पीकर गरियाते हैं तो कम से कम एक बार यह वीडियो जरूर देखना चाहिए। अगर आप यह वीडियो नहीं देख पा रहे हैं तो सीधे बात यह कि आप चीन में ट्रेन में सफर करना चाहते हैं तो स्टेशन पर ट्रेन के डिब्बे के सामने कतार में खड़े हो जाएं। स्थानीय रेलवे सुरक्षा बल आपको धकेल धकेल कर ट्रेन के अंदर तक पहुंचा देगा।
लीजिए यह वीडियो देखिए
लीजिए यह वीडियो देखिए
Thursday, June 26, 2008
अब रेल रोकने का फैशन

राजस्थान में एसटी में आरक्षण मांग रहे गुर्जर समाज ने देश भर को ऐसा फंडा दे दिया जो सारे देश के रेल यात्रियों पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। 27 दिन राजस्थान से गुजरने वाली ट्रेनें अस्तव्यस्त रहीं और रेलवे को करोड़ों रुपए यात्रियों को टिकट कैंसिल कराने पर लौटाने पड़े। पूरे देश में बच्चे नानी दादी के छुçट्टयां मनाने से वंचित रहे सो अलग।आरक्षण का आंदोलन बड़ी मुश्किल थमा कि मुंबई में सिरसा डेरा प्रमुख गुरुमीत राम रहीम सिंह के चेले की गोली से मुंबई में एक व्यक्ति की मौत के विरोध में पंजाब और हरियाणा में रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। अब बताइये कि आरक्षण न मिलने और गोली चलने में रेलों की क्या गलती। अगर लालूजी के रिश्तेदार या पार्टी वाले ने भी गोली चलाई होती तो भी ट्रेनें ठप करने का दमदमी टकसाल का निर्णय सही होता। अब 26 जून की कहानी सुनिए, जयपुर के पास फुलेरा में एक ट्रेन के स्टॉपेज करने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों ने चार ट्रेनों को चार घंटे तक रोके रखा। बाद में एडीआरएम के स्टॉपेज जारी रखने के आश्वासन के बाद ही ग्रामीणों ने ट्रेन को जाने दिया।
Wednesday, June 18, 2008
अभी तो और फलेगे फूलेगा आरक्षण का जिन्न
राजस्थान में 27 दिन से चल रहा आरक्षण आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया। दो साल में 65 जानों के बदले गुर्जरों को अति पिछड़ा वर्ग की एक विशेष स्लैब बनाकर पांच और जातियों के साथ पांच फीसदी आरक्षण की बात कही गई है। इसके साथ साथ मुख्यमंत्री ने आर्थिक रूप से पिछडे़ ब्राहमण, वैश्य, राजपूत और कायस्थों को राज्य सेवाओं में 14 फीसदी आरक्षण की सौगात दी है। इसके साथ ही प्रदेश में अब 68 फीसदी नौकरियां आरक्षित वर्गों के लिए सुरक्षित हो जाएंगी। अब जनरल कैटेगिरी के लिए 32 फीसदी सीटें ही बची हैं।इससे राजस्थान की समस्या भले ही खत्म हो जाए, लेकिन यह आरक्षण का जिन्न पूरे देश में तबाही मचाएगा। वैसे भी गुर्जरों के इस आंदोलन ने लोगों को प्रदर्शन का एक और तरीका सिखा दिया। अब तो लगता है कि लाख पचास हजार की भीड़ रखने वाला कोई भी आंदोलनकारी एक दो दिन के लिए तो पूरे देश की परिवहन व्यवस्था आसानी से चौपट कर सकता अपन का तो मानना है कि आरक्षण नाम की इस बीमारी का नौकरी में तो बिल्कुल सफाया हो जाए। जिसे जो देना है आर्थिक सहायता दी जाए। ताकी बच्चे पढे़ लिखें और उसके बाद जो हांसिल कर सकते हैं अपनी मंजिल पाएं। वैसे सीधी बात यह है कि सरकार और ये राजनेता बताएं कि आजादी के बाद से अब तक साठ से ज्यादा वर्षों में आरक्षण का फायदा किसको मिला। अगर किसी को मिला है तो कम से कम उनको तो अब इस रेंज से बाहर किया जाए, ताकी दूसरें लोग भी इसका फायदा उठा सकें।राजनेता अपने चुनावी फायदे के लिए आरक्षण खत्म नहीं करना चाहते, कोई पार्टी इतनी हिम्मतवाली नहीं है, जो सीधे तौर पर आरक्षण की व्यवस्था का विरोध करे। वैसे अब सही वक्त आ गया है, जब देश वासियों को सोचना चाहिए कि उसी पार्टी का समर्थन करे, जो इस व्यवस्था को खत्म करने की बात करे।
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