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Monday, December 24, 2007

अपन के मोदी कुंवारे या शादीशुदा


गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र भाई मोदी अविवाहित हैं या उनकी शादी हो चुकी है। अपन इस पचडे में नहीं पडना चाहते, असलियत या तो मोदी जानें या भगवान। बस अपन ने तो कल एक पोस्‍ट 'मोदी की जीत का पोस्‍टमार्टम' में एक जगह जिक्र कर दिया था कि मोदी का अविवाहित होना भी उनके पॉलीटिकल करियर में लाभदायक रहा। क्‍यूंकि भारत में आम मान्‍यता है कि कुंवारे आदमी के लिए सोचा जाता है कि जिसका परिवार ही नहीं है वह जनता सरकार के पैसे को क्‍यूं खाएगा।
लेकिन अपने आवारा बंजारा वाले संजीत भाई को मोदी के अविवाहित लिखने पर आपत्ति थी। अपन ने तुंरत यह जानकारी पोस्‍ट से हटा ली। अब दिनभर अपन ने खोजबीन की तो यह जानकारी सामने आई कि एक महिला जसोदाबेन मोदी ने नरेंद्र भाई मोदी की पत्‍नी होने का दावा किया है। वहीं नरेंद्र मोदी हमेशा खुद को अविवाहित बताते आए हैं। उनका संघ प्रचारक होना भी इस दावे को मजबूत करता है, लेकिन इस चुनाव में उनके विरोधियों ने इस मामले को उठाया और चुनाव आयोग को उनकी इस कथित पत्‍नी की जानकारी देकर गलत जानकारी के आरोप में नामंकन पत्र खारिज करने की मांग की है।
उस महिला का वीडियो यू टयूब पर भी उपलब्‍ध है। वीडियो में रजोसाना प्राइमरी स्‍कूल भी दिखाई है जिसमें वे पढाती हैं। इस वीडियो में उनके भाई अशोक भी दिखाए गए हैं।


यह महिला मोदी के पुराने फोटो भी दिखाती हैं, इसके अलावा उनके पास मोदी की दी हुई संघर्ष मा गुजरात किताब भी रखी है। जसोदाबेन के अनुसार उनकी शादी 1968 में हुई। मोदी तीन साल तक उनके साथ रहे और एक दिन अचानक उन्‍हें छोडकर चले गए।

बीबीसी की वेबसाइट पर मोदी की प्रोफाइल में एक महिला के उनकी पत्‍नी होने के दावे वाली बात कही गई है, लेकिन उन्‍होंने भी यही कहकर कि मोदी की ऑफिशियल प्रोफाइल में पत्‍नी का जिक्र नहीं है। पल्‍ला झाल लिया है।
विकीपीडिया पर शादी के मामले में कोई जानकारी नही है। वहीं डीएनए में आठ दिसंबर को संजय सिंह की एक खबर ने स्‍थानीय भाजपा नेताओं के हवाले से लिखा था कि यह बाल विवाह का मामला था और मोदी ने उनसे तलाक नहीं लिया लेकिन वे कभी उस महिला के साथ रहे भी नहीं। वैसे गुजरात के अखबारों में ये खबरें बीच बीच में छपती आई हैं।
वैसे एक बात की इस वीडियो और इस तरह की खबरों का टाइमिंग चुनाव के आसपास का ही क्‍यूं चुना गया। इतने वर्षों से यह महिला चुप क्‍यूं थी। इस पर महिला ने तो यही कहा कि उन्‍होंने नरेंद्र भाई से कई बार मिलने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। पर आप क्‍या कहेंगे।

किसी को इससे जानकारी उपलब्‍ध हो तुरंत सूचित करे

मोदी की जीत का पोस्‍टमार्टम


गुजरात में मोदी की हर मायने में दूसरे चुनावों में दूसरे नेताओं की जीत से अलग है। मीडिया से लेकर विरोधी तक मोदी के पीछे पडा था और विकास या दूसरे मुददों को छोड लोग अब तक गोधरा का मामला उठाए जा रहे थे। इस जीत के पीछे क्‍या कारण रहे यह जानते है।

मोदी का निश्‍कलंक जीवन
मोदी का व्‍यक्तिगत जीवन बेदाग रहा है और उनका पॉलिटिकल करियर भी साफ सुथरा है। इसने भी मोदी को तीसरी बाद मुख्‍यमंत्री बनवाने में अहम भूमिका निभाई है।

गुजरात का गौरव
साढे पांच करोड गुजरातियों की अस्मिता की बात करने वाले मोदी का यह स्‍टाइल भी गुजरात में खासा लोकप्रिय है। मोदी जब गुजरात गौरव और वाइब्रेंट गुजरात की बात करते हैं तो उनके विरोधी भी भाग खडे होते हैं।

विकास का मुददा
गुजरात में विकास की बात को हर आदमी स्‍वीकरा करता है। यह बात भी मोदी के खाते में गई है। निवेशक गुजरात में पैसा लगाने को तैयार हैं। आंकडे इसकी पुष्टि करते हैं। भले ही किसी ने कितनी भी बुराई क्‍यूं न कर ली हो। विकास गुजरात में दिखाई देने लगता है। ज्‍यादातर लोगों की बिजली, पानी और सडक जैसी समस्‍याएं अब खत्‍म हो गईं।

कामकाज में ईमानदारी
गुजरात में विपदाओं के समय विशेषकर सुनामी और भूकंप के समय किए गए कार्यों और उनके टिकाऊपन ने भी भाजपा में लोगों का विश्‍वास बनाए रखा। मोदी के काल में प्रशासनिक स्‍तर पर भी चुस्‍ती का फायदा उन्‍हें मिला है।

टिकट बंटवारा
गुजरात के पूरे चुनावों में केंद्रीय नेतृत्‍व में सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी पर दांव खेला वहां न तो उनकी मंजूरी के बिना किसी और को गुजरात मे प्रचार करने भेजा गया न ही, किसी और नेता ने कोई बयान दिया। टिकट वितरण में पूरी तरह मोदी की चली और उन्‍होंने कई वर्तमान विधायकों के टिकट काट दिए। हालाकि उनमें से कुछ पटेल लॉबी और केशुभाई समर्थकों ने निर्दलीय या कुछ ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लडे पर मोदी के आगे उनकी पेश नहीं खाई।

और सबसे बडी बात एंटी इनकंबैंसी फैक्‍टर को मोदी ने अंगूठा दिखा दिया उन्‍होंने बता दिया कि विकास में हिन्‍दुत्‍व का तडका लगाकर कैसे विजेता बना जाता है।
(गुजरात पर इसी महीने में यह तीसरी पोस्‍ट है, इसे अन्‍यथा न लें सुझावों से जरूर अवगत कराएं। बुरे को बुरा और अच्‍छे को अच्‍छा लिखें ताकी आपको कचरा पढने से मुक्ति मिले - राजीव )
मोदी के तारे आसमान में क्‍यूं बदनाम करते हो गुजरात को

Sunday, December 23, 2007

मोदी के तारे आसमान में


सोनिया का गुजरात कैंपन में मौत का सौदागर बोलना मोदी की जीत का टर्निंग प्‍वाइंट रहा और मोदी कांटे की लडाई से जीत को कांग्रेस के हाथों छीन लाए।
इस जीत में मोदी की आक्रामकता के साथ साथ उनका अतिविश्‍वास का भी तगडा योगदान है। विपक्ष तो विपक्ष अपनी ही पार्टी में विरोधियों से घिरे होने के बाद मोदी ने जो जुजारूपन दिखाया वह काबिले तारीफ है। अब मोदी की जीत का यह पैटर्न भाजपा के साथ साथ कांग्रेस के लिए भी कई राज्‍यों में आदर्श होगा।
हो सकता है राजस्‍थान के असंतुष्‍ट भी अब दुबक कर वसुंधरा के पाले में बैठ जाएं। केशुभाई पटेल और कांशीराम राणा हश्र जो हुआ है वो देख ही चुके हैं।
वैसे हम माने या न मानें इस देश में व्‍यक्तिगत राजनीति का दौर फिलहाल नहीं है। भाजपा से बाहर होने के बाद हमने कल्‍याण सिंह का हश्र देखा थ और अब उमा भारती का देख रहे हैं। हमें मान लेना चाहिए कि एक अरब के इस देश में पार्टी या विचारधारा ही चुनाव जिता सकती है। राहुल गांधी का कैंपन कांग्रेस के लिए कोई खास लाभकारी रहा हो ऐसा मुझे नहीं लगता। न तो गुजरात में ही और न ही इससे पहले उत्‍तर प्रदेश में दोनों ही जगह कांग्रेस नेताओं ने गांधी परिवार की इज्‍जत बचाने के लिए यही कहा कि पार्टी को सीटें भले न मिलीं हों, लेकिन वोटिंग परसेंट जरूर बढा है। एक और बात मोदी केंद्रीय राजनीति में आएं ऐसा भी दिखाई नहीं देता। ये सब पॉलिटिकल स्‍टंट हैं, जब तक आडवाणी जिंदा है, मोदी केंद्रीय राजनीति में न आएंगे न आने दिए जाएंगे।
बस यह हमें मानना होगा कि भाजपा को एक जनाधार वाला नेता मिला है, जिसकी अपनी ब्रांड इमेज है, तोगडिया या विहिप के लोग जो बरसों पहले उग्र कैंपन करते थे, यह काम अब देश भर में मोदी करेंगे। भाजपा उनकी इस छवि का फायदा उठाने से कहीं कम नहीं रहने वालीं।

Wednesday, December 12, 2007

क्‍यूं बदनाम करते हो गुजरात को


खबर देना मीडिया का काम है और गुजरात चुनाव भी उसी जिम्‍मेदारी का हिस्‍सा है। लेकिन इस बार गुजरात चुनाव के दौरान मोदी और भाजपा विरोधी पत्रकार लॉबी इस तरह मोदी के पीछे लग गई है कि पूरा गुजरात बदनाम हो रहा है।
दिल्‍ली में बैठकर तथाकथित नेशनल मीडिया अपनी विचारधारा के हिसाब से मोदी पर पिल पडा है और इसी चक्‍कर में रोज और हर रोग गुजरात के जख्‍म हरे हो जाते हैं। लोग शायद भूल गए हों पर मीडिया को याद रखना चाहिए कि गोधरा के बाद यह दूसरे विधानसभा चुनाव हैं। जिस तरह पॉलिटिकल पार्टी के नेता गुजरात या भाजपा का जिक्र आते ही गोधरा का नाम लेने लगते हैं, वैसा ही काम आजकल भाजपा विरोधी लॉबी वाले पत्रकारों ने संभाल रखा है। अरे भाई कम से कम जनादेश का तो सम्‍मान करो जनता ने चुनकर मोदी को मुख्‍यमंत्री बनाया है, वो कोई तानाशाह तो नहीं है, जो पिल पडे उसके पीछे। जनता है जब उसे ही तय करना है तो वोट पड रहे हैं फैसला हो जाएगा कि जनता किसको चाहती है, आप जबरन अपनी फिलोसोफी क्‍यूं छोंक रहे हैं।

कुछ पत्रकार, चैनल और मीडिया ग्रुप तो मोदी के पीछे इस तरह पडे हैं, जैसे गोधरा और उसके बाद हुए नरसंहार के लिए अकेले मोदी ही दोषी थे। (अगर आप उनकी दिल की तसल्‍ली के लिए मान भी लें तो) जनाब हर आदमी के पास दिमाग होता है उसे पता है कि क्‍या अच्‍छा है क्‍या बुरा है, हर आदमी के अपने सिदधांत हैं उसकी नैतिकता है। अगर आम आदमी चाहता तो सौहार्दता पूर्ण रह सकता था, दंगे भडके ही क्‍यूं।
अब जो भी हो गोधरा के बाद गुजरात में मोदी की दूसरी टर्म में मुझे याद नहीं कोई बडा दंगा या ऐसी घटना हुई हो जिससे साम्‍प्रदायिक सौहार्द बिगडा हो। बिलकिस या एक आध मामले छोड दें तो गुजरात से बलात्‍कार की घटनाएं यूं रोजमर्रा की तरह तो सामने नहीं आतीं।
गुजरात में जिस तरह लडकियां देर रात तक शहर में अकेले घूम सकती हैं ऐसा प्रदेश दूसरा कौनसा है, जरा बता दीजिए।

विकास और इंडस्‍टरी के मामले में गुजरात से टक्‍कर लेने वाला राज्‍य कौनसा है।
रविशजी ने भी अपने अनुभवों में लिखा था कि गुजरात का आम आदमी मानता है विकास हुआ है। मेरे दो चार परिचित हैं वे भी यही मानते हैं कि चाहे जो हुआ हो लेकिन अब गुजरात में विकास दिखता है। मैं भी पिछले साल फरवरी में दमन द्वीव घूमने गया और एक तरफ के सफर का काफी हिस्‍सा तो एसटीए की बस में तय किया। उस दौरान लोगों से बात की, सडके देखी, माहौल देखा। बिंदास खर्चीले मस्‍तमौला लोग देखे उन्‍हें देखकर नहीं लगता कि यहां कभी उस तरह का माहौल रहा होगा।
भुज का भूकंप, सुनामी के दिन या सूरत का प्‍लेग हर मामले में विपदा झेलने के बाद गुजरात हर बार पहले से सुंदर और शक्तिशाली होकर उभरा है।
अपने पॉलिटिकल प्रॉफिट या पॉलिटिकल फ़यूचर के लिए राजनेताओं ने और उसके समर्थक मीडिया वालों ने गुजरात को इतना बदमान कर दिया, कि बापू के पैदा होने से गुजरात जितना सम्‍मानित हुआ था उससे भी यह पाप अब बैलेंस नहीं होता।