Wednesday, December 12, 2007

क्‍यूं बदनाम करते हो गुजरात को


खबर देना मीडिया का काम है और गुजरात चुनाव भी उसी जिम्‍मेदारी का हिस्‍सा है। लेकिन इस बार गुजरात चुनाव के दौरान मोदी और भाजपा विरोधी पत्रकार लॉबी इस तरह मोदी के पीछे लग गई है कि पूरा गुजरात बदनाम हो रहा है।
दिल्‍ली में बैठकर तथाकथित नेशनल मीडिया अपनी विचारधारा के हिसाब से मोदी पर पिल पडा है और इसी चक्‍कर में रोज और हर रोग गुजरात के जख्‍म हरे हो जाते हैं। लोग शायद भूल गए हों पर मीडिया को याद रखना चाहिए कि गोधरा के बाद यह दूसरे विधानसभा चुनाव हैं। जिस तरह पॉलिटिकल पार्टी के नेता गुजरात या भाजपा का जिक्र आते ही गोधरा का नाम लेने लगते हैं, वैसा ही काम आजकल भाजपा विरोधी लॉबी वाले पत्रकारों ने संभाल रखा है। अरे भाई कम से कम जनादेश का तो सम्‍मान करो जनता ने चुनकर मोदी को मुख्‍यमंत्री बनाया है, वो कोई तानाशाह तो नहीं है, जो पिल पडे उसके पीछे। जनता है जब उसे ही तय करना है तो वोट पड रहे हैं फैसला हो जाएगा कि जनता किसको चाहती है, आप जबरन अपनी फिलोसोफी क्‍यूं छोंक रहे हैं।

कुछ पत्रकार, चैनल और मीडिया ग्रुप तो मोदी के पीछे इस तरह पडे हैं, जैसे गोधरा और उसके बाद हुए नरसंहार के लिए अकेले मोदी ही दोषी थे। (अगर आप उनकी दिल की तसल्‍ली के लिए मान भी लें तो) जनाब हर आदमी के पास दिमाग होता है उसे पता है कि क्‍या अच्‍छा है क्‍या बुरा है, हर आदमी के अपने सिदधांत हैं उसकी नैतिकता है। अगर आम आदमी चाहता तो सौहार्दता पूर्ण रह सकता था, दंगे भडके ही क्‍यूं।
अब जो भी हो गोधरा के बाद गुजरात में मोदी की दूसरी टर्म में मुझे याद नहीं कोई बडा दंगा या ऐसी घटना हुई हो जिससे साम्‍प्रदायिक सौहार्द बिगडा हो। बिलकिस या एक आध मामले छोड दें तो गुजरात से बलात्‍कार की घटनाएं यूं रोजमर्रा की तरह तो सामने नहीं आतीं।
गुजरात में जिस तरह लडकियां देर रात तक शहर में अकेले घूम सकती हैं ऐसा प्रदेश दूसरा कौनसा है, जरा बता दीजिए।

विकास और इंडस्‍टरी के मामले में गुजरात से टक्‍कर लेने वाला राज्‍य कौनसा है।
रविशजी ने भी अपने अनुभवों में लिखा था कि गुजरात का आम आदमी मानता है विकास हुआ है। मेरे दो चार परिचित हैं वे भी यही मानते हैं कि चाहे जो हुआ हो लेकिन अब गुजरात में विकास दिखता है। मैं भी पिछले साल फरवरी में दमन द्वीव घूमने गया और एक तरफ के सफर का काफी हिस्‍सा तो एसटीए की बस में तय किया। उस दौरान लोगों से बात की, सडके देखी, माहौल देखा। बिंदास खर्चीले मस्‍तमौला लोग देखे उन्‍हें देखकर नहीं लगता कि यहां कभी उस तरह का माहौल रहा होगा।
भुज का भूकंप, सुनामी के दिन या सूरत का प्‍लेग हर मामले में विपदा झेलने के बाद गुजरात हर बार पहले से सुंदर और शक्तिशाली होकर उभरा है।
अपने पॉलिटिकल प्रॉफिट या पॉलिटिकल फ़यूचर के लिए राजनेताओं ने और उसके समर्थक मीडिया वालों ने गुजरात को इतना बदमान कर दिया, कि बापू के पैदा होने से गुजरात जितना सम्‍मानित हुआ था उससे भी यह पाप अब बैलेंस नहीं होता।

5 comments:

विनीत कुमार said...

भइया गुजरात को नक्शे और मीडिया के जरिए ही जानता हूं. जल्द ही जाना होगा। तब तो तुम्हारी बातों पर ही यकीन करके जाना होगा।

संजय बेंगाणी said...

मीडिया के अपने एजेंडा है. गुजरात की प्रजा बेवकुफ नहीं है.

मिहिरभोज said...

बदनामी गुजरात की नहीं हो रही लोगों के असली चेहरे देखने में आ रहे हैं आतंकवादियों और राष्ट्रद्रोहियों को शह देते देते ये छद्मधर्मनिरपेक्षवादी पार्टीयां और मीडिया वाले बेनकाव हो रहे हैं

vijayshankar said...

सच बात है. रिपोर्टिंग पूर्वग्रह से ग्रसित नहीं होनी चाहिए. बुराइयों के साथ-साथ अच्छाइयों को भी समान अनुपात में जगह देना चाहिए. वरना मीडिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ खड़ा होता है, जो कम से कम भविष्य की पत्रकारिता के लिए शुभ नहीं होगा.बात गुजरात की बदनामी की ही नहीं है; इससे भारत की भी बदनामी होती है. एक बात और, चुनाव जीतना किसी भी देश में अच्छे-बुरे का पैमाना नहीं होता.

papiya said...

well sir
Good,at least u thought of something not related to Jaipur or Rajasthan.But being a journo as ur profile says so ,according to me u should not act pro Modi.A journo must be neutral and write about the prevailing scenario.Though u wrote that media persons are going anti-modi,let me assure u thats not the case. Actually they are writting what is being told in campaigning and election agendas.Moreover,ur write-up do not clarify what exactly the issues u are talking about that media blowed out of proportion?? Let me make it clear ,that if u r talking about shorabbuddin case ,indeed its an issue otherwise SC wont have acted upon the speech. Again ,it is not only Modi who is under SC's knife ,in fact Sonia was also not spared on her "Maut ka Saudagar" dailogue. We mediapersons ,very well covered that also. So where is the question of being partial. Look being in to this field we have to essentially write whats going on either in favour or against the government or Modi whoever matters more to u!!!!!!!!. I could analyse these matters clearly as i m covering entire elections in Gujarat,as a media person.