Wednesday, October 10, 2007

चुनाव कैसे जीतते हैं गिरधारीलालजी से सीखो


जयपुर के जवाहर कला केंद्र में इन दिनों एक मेला चल रहा है। एक शाम की बात है मैं दोस्‍तों के साथ बाहर खडे होकर गपशप कर ही रहा था कि अचानक नजर पडी की मेनगेट पर चना जोरगरम बेच रहे एक आदमी के सामने शायद जानी पहचानी शक्‍ल वाला बुजुर्ग खडा है।
मैंने घूरकर देखा तो याद आया ओह ये तो अपने सांसद गिरधारीलाल भार्गवजी हैं। आजू बाजू देखा तो उनके साथ एक महिला भी थी और शायद एक युवक जो संभवतय उनकी पत्‍नी और रिश्‍तेदार ही होंगे।
इतने में ही सपरिवार भार्गवजी का सपरिवार नाश्‍ता खत्‍म हुआ और भार्गवजी ने रुपए देने के लिए अपनी जेब में हाथ डाला और उनकी इस अदा का कायल हुए बिना दुकानदार भी न रहा और पैरों की ओर झुककर उनका अभिवादन करके रुपए न देने की गुजारिश करने लगा। बस सांसद साहब ने कब के गले लगाया दो मिनट बात की और अपनी कार में बैठकर विदाई ली।
बस यही एक अदा है जो भार्गव साहब को लगातार छह बार से संसद तक पहुंचा देती है। जयपुर वाले तो इस बात को जानते ही हैं अब बाकी भी पढ ले कि भार्गव साहब जब जयपुर में होते हैं तो सुबह उठकर सारे उखबारों से तीये की बैठक की जगह नोट करते हैं और निकल पडते हैं वहां के लिए। बस ये अदा है क‍ि भले ही उन्‍होंने काम धाम कुछ कराया हो या न हो लेकिन एक मध्‍यमवर्गीय आदमी को यह बात ताजिंदगी याद रहती है। मुझे पता है कि कोई सांसद इसे तो नहीं पढ रहा होगा। गलती से कभी पढ ले तो भैया सीख लीजिएगा चुनाव जीतने के गुर। वोट आम आदमी ही देता है, वो नहीं जो फाइव स्‍टार में मिलते हैं क्‍यूंकि उन्‍हें तो वोट डालने की फुर्सत ही नहीं होती।

4 comments:

Udan Tashtari said...

गुर अच्छा बतलाया. कभी भविष्य में संसद की तरफ रुख किया तो काम आयेगा. :)

वैसे भार्गव जी का कार्य है सराहनीय.

अनिल पाण्डेय said...

achhi jankari hai, bhavishya mein upyog ki ja sakti hai.

आशीष said...

bahut sahi

cma said...

sahi kaha sir aapne. yai bhargava ji k ayai roop to mai bachpan se dekh rahi hu. jab se hosh sambhala hai unhe aapne ghar kai har function mai paaya hai.
logo ko kuch sikhna chahiye unse naita na sahi ek baehtar insaan to ban hi jayaige

aur aapke liye complement bhai jawab nahi aapka aur aapki parkhi nazro ka