Saturday, March 7, 2009

एक अच्‍छी हॉरर फिल्‍म है 13 बी

एक दोस्त का ट्रान्सफर हो गया तो उसकी विदाई पार्टी मनाने के लिए कल रात 9 से 12 के शो में एक हॉरर फिल्‍म देखने चले गए। फिल्‍म का नाम बहुत अजीब था, 13 बी। यूं तो मुझे हॉरर फिल्‍में खास पसंद नहीं है। पर यह फिल्‍म कुछ अलग तरह की है, बेझिझक देखी जा सकती है।
फिल्‍म के मुख्‍य किरदार हैं मनु यानी आर माधवन। कहानी कुछ इस तरह है कि एक आठ लोगों का परिवार एक नए घर में शिफट होता है, घर का एडेस है 13 बी। यानी एक नई बिल्डिंग की 13वीं मंजिल पर। शिफटिंग के बाद, लगातार घर में रोज दूध फट रहा है और मंदिर वाले कमरे में भगवान की तस्‍वीर टांगने के लिए कील नहीं ठोकी जा सकी है।
अचानक ही एक बजे टीवी ऑन होता है और उस पर एक सीरियल शुरू होता है ‘सब खैरियत’। उस पर आने वाली कहानी बि‍ल्‍कुल उस परिवार से मिलती है। वही आठ लोगों का परिवार सेम वो ही घटनाएं। बस इसी सीरियल और घटनाओं की आड में कहानी आगे बढती है।

इतने में ही मनु के साथ कुछ अजीब होने लगता है, जैसे उसकी मोबाइल पर खींची गई तस्‍वीरें डिस्‍टाकट हो जाती हैं, वो लिफट में जाता है तो लिफट नहीं चलती। बाकी सारे लोगों की तस्‍वीरें भी ठीक आ रही हैं और वो लिफट से भी आ जा सकते हैं। दूसरे ही दिन खुद मनु भी वो एपीसोड देखता है तो उसे समझ आता है कि उसकी कहानी और उस टीवी सीरियल की कहानी बिल्‍कुल एक जैसी है।
मनु अपने पुलिस इंस्‍पेक्‍टर दोस्‍त की मदद लेता है उसे कहानी बताता है, पहले तो मानता नहीं पर जब खुद वो सीरियल देखता है तो वो भी कहानी में इनवोल्‍व हो जाता है। कहानी आगे चलती है तो उसे पता चलता है कि एक दिन हथौडा लेकर एक आदमी उसके घर गया है और उसके परिवार के सभी आठ लोगों का कत्‍ल कर देता है।
मनु उस आदमी की तलाश कर ही रहा होता है कि उसे अगले दिन के एपीसोड में खुद अपना ही चेहरा दिखता है हथोडा लिए हुए। वह अपने आप को परिवार से दूर एक जगह बंद करवा लेता है ताकी उसके परिवार को कोई खतरा न हो सके।
फिल्‍म में हत्‍यारा कौन है यह बात मैं आपको बता नहीं रहा क्‍योंकि आपका मजा किरकिरा हो जाएगा।

इसलिए डिफरेंट है मूवी
फिल्‍मांकन मजेदार है और पागल की एक्टिंग जबरदस्‍त है। एक और खास बात है कि यह पहली हॉरर फिल्‍म होगी जिसमें भूत टीवी में है यानी सुपरनेचुरल पावर और टैक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल वर्ना अब तक की हॉरर फिल्‍मों में साया दिखता और तांत्रिक आता। यहां डॉक्‍टर ही सुपरनेचुरल पावर में विश्‍वास करता है। कहानी में इतनी कसावट है कि नींबू मिर्च, अजीबोगरीब अवाजें और साए दिखाए बिना ही स्‍टोरी एस्‍टेबलिश हो जाती है यानी हॉरर फिल्‍म वो भी बिना किसी भूत के।
हां, शुरुआत के 20-25 मिनट की फिल्‍म थोडी ऊबाउ लग सकती है, पर उसके बाद आपको पलक झपकने का भी मौका नहीं मिलेगा। डायरेक्‍टर ने प्रभावी स्‍टोरी पर काम किया है। फिल्‍म में माधवन के बाद उनकी पत्‍नी बनीं नीतू चंद्रा के हिस्‍से भी दो चार सीन आए है, जिनमें वो अच्‍छी जमी। बहुत दिनों बाद पूनम ढिल्‍लो नजर आई हैं।
फिल्‍म में दो गाने हैं जिनमें से एक 'आसमान ओढ़ कर' स्‍लो है और अच्‍छा लगता है।

हां एक और खास बात
फिल्‍म में रेसेपी बुक की आड में एक रोमांटिक सिक्‍वेंस भी है। आप फिल्‍म देखकर आएं और भाभी घर हों तो टंगडी कबाब जरूर बनाएं :)

(मैंने रात नौ बजे के शो में एक हॉरर फिल्‍म देखी, यह तब है ज‍बकि इस फिल्‍म की कहानी का प्‍लॉट और मेरे मकान की कहानी भी काफी मिलती है, यह सब दूसरी किस्‍त में )

3 comments:

अनिल कान्त : said...

अच्छी समीक्षा की है आपने

sudhakar soni,cartoonist said...

rajeev bhai tv sambhalkar dekhna kahi aisa na ho is baar serial me kisi S.sub editor ki kaHAMNI DIKHAI JA RAHI HO

neelima sukhija arora said...

ye kaunsi film hai yaar hamen to pata hi nahi chalaa