पहला मौसम विभाग, किसी काम का नहीं, जो कहे सो होना नहीं। इतने दिन से चिल्ला चिल्ला कर कह रहे थे 15 जून तक मानसून आ जाएगा, इस बार मानसून अच्छा है। अपने दिमाग में उसी दिन खटका हुआ, कि इस बार तो बारिश गायब समझो। भगवान न करे ऐसा हो, पर लग नहीं रहा कि इस बार ज्यादा बारिश होगी। यानी ऐसा डिपार्टमेंट जिसकी एक भी भविष्यवाणी आजतक सही निकली। और तो और केंद्र सरकार ने इस बेमतलब के विभाग के लिए करोडों रुपए स्वीकृत कर रखें हैं ताकी मौसम का 24 घंटे वाला चैनल शुरू किया जा सके। अब बताइये जरा, जो करोडों हिन्दुस्तानियों के इंतजार की घडियां ठीक ठीक न बता सकें उस विभाग को पालने पोसने का क्या फायदा। इससे तो यह काम ज्योतिषियों को ही दे दें। इनसे अच्छी घोषणा तो वे ही कर देंगे !

(चित्र गूगल बाबा के सहयोग से )
दूसरा है अपना देवस्थान विभाग (राजस्थान का ऐसा विभाग जो मंदिरों की देखरेख करता है, शायद सिर्फ राजस्थान में ही है)। अब बताइये सरकार है धर्मनिरपेक्ष और सरकार ने एक विभाग बना रखा है, जो मंदिरों और भगवानों की पूजा पाठ व देखरेख कराए। तब भी मंदिरों के हालत ऐसे कि आप शरमा जाएं। इससे तो इस विभाग को बंद कर दें ताकी इस विभाग की फाइलों पर खर्च होने वाले बजट से ही किसी मंदिर का न सही किसी भक्त का ही भला हो।
अब बात करें फायदे की
इन दो विभागों को बंद करके सरकारों को तबादला विभाग खोलने चाहिए। हर टांसफर की रेट फिक्स हो, पब्लिक भी खुश और सरकार भी। जिसे कराना है तबादला वो तो आज भी पैसा खर्च कर ही रहा है, अब सरकार के पास जाएगा तो थोडा बहुत वापस पब्लिक तक भी पहुंचेगा, वर्ना नेता और बिचौलिए पूरा ही खा रहे हैं।