Friday, May 23, 2008

आरक्षण के नाम पर फिर खून खराबा


photo : UNI
मेरे राजस्थान को किसी की बुरी नजर लग गई है। दस दिन में दूसरी बार फिर चर्चा में है। गुर्जरों ने कनüल किरोड़ी सिंह बैंसला के नेतृत्व में एसटी में आरक्षण की मांग को लेकर 23 मई से आंदोलन शुरू किया। भरतपुर जिले के पीलूकापुरा और समोगर में रेल रोक रहे उपद्रवियों पर फायरिंग में 16 लोगों की मौत हो गई, 50 से ज्यादा घायल हो गए। मृतकों में एक पुलिस कांस्टेबल भी है। डुमरिया रेलवे स्टेशन के पास 16 हजार से ज्यादा लोग जमे हुए हैं, जो अपने नेता कनüल बैंसला के कहने पर कुछ भी कर सकते हैं। हालाकि सरकार ने देर शाम डैमेज कंट्रोल का काम शुरू किया। डीजीपी हवाई दौरे पर गए, कैबिनेट और भाजपा की बैठक बुलाई गई। नेताओं को अपने इलाके में जाकर उपद्रवियों से बातचीत करने को कहा गया। गुर्जरों के दूसरे धड़े के नेता अतर सिंह भडाना और प्रहलाद गुंजल को हिरासत में लिया गया। पर शायद ये प्रयास नाकाफी हैं।
आंदोलन के पहले दिन यह हाल था, पता नहीं अभी कितनों की और जान जाएगी। पहले दिन की कारüवाई में गुर्जरों ने भी फायरिंग की। अब सरकार बताए कि इतने हथियार कहां से आए, स्थानीय समाचार पत्रों ने बार बार निकम्मे प्रशासन को याद दिलाया कि पिछले साल आंदोलन के दौरान गुर्जरों के पास ऑटोमैटिक मशीनगन और एके 47 जैसे हथियार थे। गुर्जर समाज के लोग सेना में खूब है, बताया जाता है कि कुछ लोगों ने उन्हीं से ये हथियार जुगाडे़ हैं।

photo : UNI
पहले दिन के आंदोलन से ही प्रदेश का एक हिस्सा पूरी तरह से कट गया है। मुंबई रूट की 8 ट्रेनें रद्द कर दी गईZ, 20 को दूसरे रास्ते से चलाया गया। राजस्थान रोडवेज को 400 बसें रद्द करनी पड़ी। यात्री जो जहां फंसा है, वहीं अटक गया। रोडवेज की दो बसें जला दी गईZ। आज तो सिर्फ रेल रोको आंदोलन था, गुर्जर नेताओं ने शनिवार से हाईवे जाम करने की धमकी दे रखी है। मुझे याद है कि पिछले साल दस दिन तक जयपुर आगरा हाइवे जाम रहा।

3 comments:

PD said...

main jab pahli baar rajsthan gaya tha(2003 me Mount Abu), tab se uskaa divaana ho gaya tha..
aapne sahi kaha hai.. kisi ki najar hi lag gayi hai..

Harinath said...

राजस्थान को किसी और की नजर नही लगी है. जहाँ ऐसी बेपरवाह सरकार है वहाँ ऐसा तो होगा ही.यहाँ विस्फोट होने के बाद इतनी हतासा और निराशा नही हुई थी, जिनती इस बार फायरिंग में गुजरो के मारे जाने के बाद हो रही है. सरकार इन लोगों की मौत को पूरी तरह से रोक सकती थी. ऐसा कुछ भी नहीं था की सब कुछ अचानक हो गया. सबको पता था की गुजर २३ को ट्रेन रोकने का अलान कर चुके हैं इसे रोकने के लिए काफी कुछ किया जा सकता था. इन मौतों के लिएसरकार ही जिम्मेदार है.

ramesh said...

बहुत ही गलत हो रहा है. सरकार के गलत कदम से और मौतें हो रही हैं. सरकार के हाथ से मामला निकलता जा रहा है. वहाँ गुजर और पुलिस आमने सामने हैं. यहाँ सरकार अब मीटिंग कर रही है.