Monday, February 11, 2008

क्‍या मतलब हुआ इसका जरा देखिए


कई बार जल्‍दबाजी या नासमझी में अर्थ का अनर्थ हो जाता है। आदमी करना क्‍या चाहता है और हो क्‍या चाहता है। ऐसा ही कुछ शायद इधर हुआ। अपन के घर एक कार्ड आया उसका मजमून आप फोटो पर क्लिक करके आराम से देख सकते हैं। पर लिखने वाले ने शायद यह सोचकर नहीं लिखा हो, जो मैं और आप समझ रहे हैं।

कार्ड में लिखा गया मेरी धर्मपत्‍नी की प्रथम पुण्‍य तिथि समारोह के शुभ अवसर पर आपको सादर आमंत्रित करते हैं।
कार्ड वाले अमूमन एक ड्राफ्ट तैयार रखते हैं और उसमें प्रोग्राम या नाम बदलकर छाप देते हैं। शायद इस तरह पुण्‍य तिथि पर समारोह का कार्ड प्रिंटिंग प्रेस वाले के पास पहली बार छपने आया हो और जल्‍दबाजी में ही यह अनर्थ हो गया हो। वर्ना यह कौन लिखना चाहता होगा कि अर्धांगनी का जाना उसके लिए शुभ अवसर है।
शायद इसीलिए कहते हैं सावधानी हटी दुर्घटना घटी

7 comments:

डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल said...

मज़ा आ गया राजीव जी. सावधानी हटी, दुर्घटना घटी को आपके क्या खूब चस्पां किया है. ईश्वर की अनुकम्पा से आपने बहुत बढिया लिखा है.

Udan Tashtari said...

:) haa haa

mamta said...

ऐसा भी होता है !

:)

Harinath said...

गुरु पता चल गया की ख़बरों में गलती पकड़ने का अच्छा अनुभव है. लगे रहो बढ़िया है.......

Sanjeet Tripathi said...

डेस्क पर हो न गुरु?
बढ़िया नज़र है, तरक्की करोगे, शुभकामनाएं

sudhakar said...

rajeev bhai kya paini nazar h aapki

REX said...

क्या कहें और कहने को क्या रह गया...