Friday, January 25, 2008

क्‍या एक अरब में से कोई भारत रत्‍न लायक नहीं


भारत रत्‍न को लेकर एक महीने तक नेताओं और दावेदारों में बहस चली। आखिर ये 26 जनवरी आ गई और अपन को पता चला कि एक अरब से ज्‍यादा की आबादी में कोई भी आदमी इस लायक नहीं है, जो सोनिया माई की नजर में भारत रत्‍न का हकदार हो। जब नेताओं के अलावा या अपनी पसंद के नेताओं के अलावा किसी को देना ही नहीं है तो इस पुरस्‍कार को बंद क्‍यों नहीं कर देते। यह लगातार सातवां साल है जब किसी शख्सियत को देश के इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए नहीं चुना गया। मुझे तो लगता है सोनियाजी को मिलने के बाद ही यह पुरस्‍कार अब फिर आमलोगों को मिलना शुरु होगा।
आखिरी बार 2001 में शहनाई के शहंशाह उस्‍ताद बिस्मिला खां साहब को यह सम्‍मान दिया गया। क्या इसके बाद देश को ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला, जिसे भारत रत्न दिया जा सके ?
सात साल में एक भी व्यक्ति को भारत रत्न न देना हैरान करता है। अपन का कहना यह नहीं है कि जबरदस्‍ती दिया जाए, पर एक अरब की आबादी में इतना बडा प्रशासनिक अमला और सरकार मिलकर ऐसे आदमी को नहीं ढूंढ सकी, जो कलाम साहब की तरह भारत रत्‍न का सही हकदार हो।
इस साल विवाद हुआ तो पता चला कि इसके लिए कोई कमेटी होती है, जो भारत रत्‍न और पदम सम्‍मानों का निर्णय करती है। अब तो जनता को पता चलना चाहिए कि इस समिति में कौन कौन काबिल लोग हैं।
वैसे भारत रत्‍नों के इतिहास को देखें तो प्रधानमंत्री या राष्‍टपति को छोडकर भारत रत्‍न पाने वालों के ज्‍यादा नाम हैं। चालीस भारत रत्‍नों में से 20 तो राजनेता रहे हैं, जिनमें भी ज्‍यादातर पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व राष्‍टपति हैं। बचे हुए लोगों में से फ्रीडम फाइटर और इक्‍का दुक्‍का वैज्ञानिक हैं। मैं यूं राज्‍यवार तो नहीं मांगता पर क्‍या अपन के राजस्‍थान में तो आजतक ऐसा कोई आदमी पैदा नहीं हुआ जिसे भारत रत्‍न दिया जा सकता था।

क्‍या टीवी पत्रकारों का ही योगदान है ?
हो सकता है कि अपन गलत लिख रहे हैं पर क्‍या आजकल सरकार को टीवी पर दिखाई देने वाले लोग ही पत्रकार दिखते हैं, या सिर्फ चुनाव पूर्व इन तीन बडे लोगों को लॉलीपॉप। क्‍या समाचार पत्रों में काम करने वालों का सामाजिक जीवन में कोई योगदान नहीं है। पदम श्री की लिस्‍ट में ही तीन टीवी पत्रकार है। मैं यह नहीं कहता कि बरखा दत्त, राजदीप सरदेसाई और विनोद दुआ को पदम पुरस्‍कार नहीं मिलने चाहिए। ये हमारे अग्रज हैं, इन्‍होंने पत्रकारिता को नई दिशा दी है, इन जैसे लोगों की वजह से लोग पत्रकारों का सम्‍मान करते हैं। मैं तो कहता हूं कि हमारे ब्‍लागर पत्रकार मित्र रवीशजी को भारत रत्‍न मिले, लेकिन प्रिंट के लोग भी सम्‍मान के हकदार हैं। पर लगता है आजकल सिर्फ टीवी से ही लोगों का ध्‍यान नहीं हटता। तो अखबार में बाईलाइन पर किसका ध्‍यान पडता होगा।


इस साल की सूची

पद्म विभूषण
प्रणव मुखर्जी - सोशल सर्विस
सचिन रमेश तेंदुलकर - खेल
आशा भोंसले - कला
रतन नवल टाटा - व्यापार एवं उद्योग
ई श्रीधरन - विज्ञान एवं इंजीनियरी
राजेन्द्र कुमार पचौरी - विज्ञान एवं इंजीनियरी
एडमंड हिलेरी ( मरणोपरांत) - खेल
विश्वनाथ आनंद - खेल
जस्टिस ए . एस . आनंद - सोशल सर्विस
पी एन . धर - सोशल सर्विस
लक्ष्मी नारायण मित्तल - व्यापार एवं उद्योग
एन . आर . नारायणमूर्ति - व्यापार एवं उद्योग
पी . आर . एस . ओबराय - व्यापार एवं उद्योग

पद्म भूषण
सुनीता विलियम्स - विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी
जसदेव सिंह - कमेंट्री और प्रसारण
लॉर्ड मेघनाद देसाई - जनसेवा
उस्ताद रहीम फहीमुद्दीन डागर - कला
अमरनाथ सहगल ( मरणोपरांत )- कला
उस्ताद असद अली खान - कला
पी . सुशीला - कला
सुशील कुमार सक्सेना - कला
चंद्रशेखर दासगुप्त - लोकसेवा
के . पद्मनाभैया - लोकसेवा
वी . रामचंद्रन - लोकसेवा
बृजेन्द्र नाथ गोस्वामी - साहित्य एवं शिक्षा
श्रीलाल शुक्ल - साहित्य एवं शिक्षा
जी . शियांलिन - साहित्य एवं शिक्षा
कौशिक बसु - साहित्य एवं शिक्षा
पद्मा देसाई - साहित्य एवं शिक्षा
रवीन्द्र केलेकर - साहित्य एवं शिक्षा
श्याम चोना - साहित्य एवं शिक्षा
श्रीनिवास एस . आर . वर्धन - साहित्य एवं शिक्षा
पी . के . ओमेन - साहित्य एवं शिक्षा
जगजीत सिंह चोपड़ा - चिकित्सा
निर्मल कुमार गांगुली - चिकित्सा
मियां बशीर अहमद - जनसेवा
वाई . एम . वोरोनसो ( मरणोपरांत )- जनसेवा
आशीष दत्ता - विज्ञान एवं इंजीनियरी
सुखदेव - विज्ञान एवं इंजीनियरी
वसंत गोवारिकर - विज्ञान एवं इंजीनियरी
डी . आर . मेहता - समाज सेवा
डोमिनिक लेपियरे - समाज सेवा
इंद्रजीत कौर - समाज सेवा
सुरेश कुमार नेवोटिया - व्यापार एवं उद्योग
बाबा नीलकंठ कल्याणी - व्यापार एवं उद्योग
के . वी . कामथ - व्यापार एवं उद्योग
शिव नाडर - व्यापार एवं उद्योग
विक्रम पंडित - व्यापार एवं उद्योग

पद्मश्री
माधुरी दीक्षित - कला
हंसराज हंस - कला
टॉम ऑल्टर - कला
बरखा दत्त - पत्रकारिता
राजदीप सरदेसाई - पत्रकारिता
विनोद दुआ - पत्रकारिता
गंगाधर प्रधान - कला
गेन्नादी मिखाइलोविच पेचिनेकोव - कला
पंडित गोकुलोत्सवजी महाराज - कला
हेलन गिरी - कला
जतिन गोस्वामी - कला
जवाहर बट्टल - कला
जॉन मार्टिल नेल्सन - कला
जोनालागड्डा गुड्प्पा चेट्टी - कला
केकु एम . गांधी - कला
मंगला प्रसाद मोहंती - कला
मनोज नाइट श्यामलन - कला
मिनाक्षी चितरंजन - कला
मूझीकुल्लम कोचुकुट्टम चकयार - कला
पी . के . नारायणन नाम्बियार - कला
प्रताप पवार - कला
सावित्री हेसनम - कला
सेंटियल टी . यांगर - कला
सिरकाझी जी . सिवाचिदम्बरम - कला
येल्ला वेंकटेश्वर राव - कला
अमिताभ मट्टू - साहित्य एवं शिक्षा
बी . शिवनाथी अदिथन - साहित्य एवं शिक्षा
भोलाभाई पटेल - साहित्य एवं शिक्षा
बीना अग्रवाल - साहित्य एवं शिक्षा
के . एस . निसार अहमद - साहित्य एवं शिक्षा
एम . लीलावती - साहित्य एवं शिक्षा
निरुपम वाजपेयी - साहित्य एवं शिक्षा
श्रीनिवास उद्गाटा - साहित्य एवं शिक्षा
सुखदेव थोराट - साहित्य एवं शिक्षा
सूर्यकांता हजारिका - साहित्य एवं शिक्षा
वेल्यानी अर्जुनन - साहित्य एवं शिक्षा
मोहम्मद युसूफ ताइंग - साहित्य एवं शिक्षा
कलीमुल्ला खान - आम्र पौधरोपण
बाइचुंग भूटिया - खेल
बुला चौधरी चक्रवर्ती - खेल
ए . जयंत कुमार सिंह - चिकित्सा
अर्जुनन राजशेखरन - चिकित्सा
सी . यू . वेलमुरुगेन्दन - चिकित्सा
दीपक सहगल - चिकित्सा
दिनेश के . भार्गव - चिकित्सा
इंदुभूषण सिन्हा - चिकित्सा
केईकी आर . मेहता - चिकित्सा
मालविका सब्बरवाल - चिकित्सा
मोहनचंद्र पंत - चिकित्सा
राकेश कुमार जैन - चिकित्सा
रमन कपूर - चिकित्सा
रंधीर सूद - चिकित्सा
श्याम नारायण आर्य - चिकित्सा
सुरेन्द्र सिंह यादव - चिकित्सा
तात्या राव पुंडलिका राव लाहने - चिकित्सा
टोनी फर्नांडिस - चिकित्सा
कोलेट माथुर - जनसेवा
भंवरलाल हीरालाल जैन - विज्ञान एवं इंजीनियरी
जोजफ एल . हलसे - विज्ञान एवं इंजीनियरी
कस्तूरी लाल चोपड़ा - विज्ञान एवं इंजीनियरी
संत सिंह वीरमाणी - विज्ञान एवं इंजीनियरी
कैलाश चंद्र अग्रवाल - जनसेवा
करुणा मैरी बरगांजा - समाजसेवा
डॉ . क्षमा मैत्रेय - समाजसेवा
डॉ . कुटिकुपल्ला सूर्यराव - समाजसेवा
मदनमोहन सब्बरवाल - समाजसेवा
डॉ . शीला भर्थाकुर - समाजसेवा
वी . आर . गौरीशंकर - समाजसेवा
विक्रमजीत सिंह साहनी - समाजसेवा
युसुफ अली एम . अब्दुलकादिर - समाजसेवा
अमित मित्र - व्यापार एवं उद्योग
इस पोस्‍ट का उददेश्‍य किसी की भावना को आहत करने का नहीं है। वैसे अपन तो ग्‍लोबल हैं, खुद को भारत रत्‍न लायक नहीं मानता :)

3 comments:

अविनाश वाचस्पति said...

जो भारत के लिये लिखे
वो रत्नों का रत्न महारत्न
जो भारत के लिये जिये
उसे नहीं चाहिये ऐसा रत्न्

डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल said...

राजीव जी, क्या आपको नहीं लगता कि अब ये रत्न, पद्म वगैरह् अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं. वो जो एक शे'र है किसी का, ऐसे ऐसे कैसे कैसे हो गए, कैसे कैसे ऐसे ऐसे हो गए - वह याद आता है. अब ज़रा इस साल की सूची ही देख लीजिए, जिन्हें पद्म सम्मान मिले हैं उन में से कितनों को हम जानते हैं? अगर भारत रत्न मिल भी जात तो क्या फर्क़ पडता? मुझे तो लगता है कि यह नाटक बन्द ही हो जाना चाहिए.

राजेंद्र said...

मोरारजी भाई ने बंद कर दिए थे ये सब अलंकरण देना जनता सरकार के दौरान. मगर ये अवार्ड जो रिवार्ड ज्यादा है फ़िर शुरू कर दिए गए अपनों को देने के लिए. अग्रवाल साहब ठीक कहते हैं. ये नाटक बंद होना चाहिए.