Thursday, September 11, 2008

रॉक ऑन यानी जिंदगी दोबारा मौका नहीं देती


बुधवार को ऑफ था दोस्तों के साथ रात नौ से 12 फिल्म देखने चला गया रॉक ऑन। मुझे फिल्म जबरदस्त लगी, इसलिए इतनी मेहनत करके पूरी की पूरी कहानी लिख दी है। जिंदगी दोबारा मौका नहीं देती, जो करना है इसी जिंदगी में कर डालिए। कुछ यही संदेश देती है फरहान अख्तर की नई फिल्म `रॉक ऑन´। अगर आप फिल्म देखते हैं तो मेरी सलाह मानिए और फिल्म देख डालिए। म्यूजिक बैंड की कहानी है, इसलिए गाने और म्यूजिक बहुत हैं। पर यकीन मानिए धैर्य के साथ फिल्म देखेंगे तो लगेगा कि कहानी कुछ प्रेरणा देती है। हां अगर सीडी पर देखेंगे तो हो सकता है कि आपको फिल्म थोड़ी कम पसंद आए।

कुछ इस तरह है कहानी
चार दोस्तों ने मैजिक नाम से एक बैंड बनाया है। केडी, जोए और रोब के इस बैंड का लीड सिंगर है फरहान अख्तर यानी आदित्य। सभी दोस्त कुछ कर गुजरना चाहते हैं, इसलिए एक रियलिटी शो में पाटिüसिपेट करते हैं। मेहनत करके जीत भी जाते हैं और उसके बाद एक वीडियो बनाने का कॉन्ट्रेक्ट साइन करते हैं। वीडियो की शूटिंग चल रही होती है कि बैंड के बाकी साथियों को लगता है कि उनका दोस्त आदित्य ही प्राइम पोजिशन पर है, बाकी लोगों को वजन नहीं दिया जा रहा। इससे गुस्साए जोए यानी अजुüन रामपाल बैंड छोड़कर चला जाता है। इससे बैंड और कॉन्ट्रेक्ट दोनों टूट जाते हैं, सिर्फ जोए और रॉब ही इसी पेशे में रहते हैं। आदित्य एमबीए करके बड़ी कंपनी में इनवेस्टमेंट बैंकर और केडी अपने पिता के फैमिली बिजनेस में चले जाते हैं।
करीब दस साल बाद आदित्य की पत्नी उसके बथüडे पर शॉपिंग के लिए केडी की शॉप पर जाती है और बातों ही बातों में वहां उसे पता चलता है कि उसका पति कभी एक सिंगर था और हंसमुख हुआ करता था। पति को खुश करने के लिए साक्षी यानी प्राची देसाई बैंड के सभी लोगों को एक साथ लाने की कोशिश करती है। जोए को छोड़कर दोनों आ भी जाते हैं, लेकिन जोए नहीं आता। उधर आदित्य को भी बुरा लगता है कि उसकी पत्नी ने उसे भूली हुई बात याद दिला दी। कुल मिलाकर सामान्य सी लगते वाली कहानी यहां काफी दमदार तरीके से पेश की गई है।
पार्टी के बाद इस बात को लेकर साक्षी और आदित्य में थोडी सी कहासुनी होती है, उसका तर्क था कि वह चार साल से पति के साथ है, लेकिन उसे पता ही नहीं चलता कि उसके पति को कब क्या अच्छा लगेगा। एक तगड़ा डायलॉग है `हम दोनों के पोस्टल एड्रेस एक है, लेकिन एक दूसरे का समझते नहीं।´ उधर, दोस्त उसे कहकर जाते हैं कि वह कल मिले बैंड को रीयूनियन करने और उधर साक्षी पति से रूठकर घर चली जाती है।
आदित्य को अपनी गलती का अहसास होता है वह साक्षी को मनाने के लिए फोन करता है और वह अपने दोस्तों से मिलने चला जाता है। थोडी मान मनोव्वल के बाद जोए भी आ जाता है और उसी के घर बैंड की प्रैçक्टस करते हैं। अब वे रोज शाम को प्रैçक्टस करने लगे और फिर से एक शो में पाटिüसिपेट करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
इस बीच बेरोजगार जोए के लिए उसकी पत्नी डेबी जो उस समय बैंड की डिजाइनर बनना चाहती थी शिप पर नौकरी खोज लेती और जिस दिन उसके शो की रिकॉडिüZग होनी है, उसी दिन शिप जाना है। इसी बीच पता चलता है कि रोब को ब्रेन टयूमर है और वह कभी भी जिंदगी को अलविदा कह देगा। रिकॉडिüZग के समय बाकी तीनों आ जाते हैं, पत्नी के अरमान पूरे क रने के लिए जोए शिप के रास्ते में था कि एफएम पर प्रोग्राम लाइव आ रहा होता है और हीरो पत्नी व बच्चे को छोड़ यह कहकर की मेरे पास आखिरी मौका है, रिकॉडिüZग के लिए पहुंच जाता है। चारों दोस्त स्टेज पर धमाल मचाते हैं और मैजिक बैंड का जादू चल जाता है। रोब का यह शो आखिरी होता है।

गजब की एçक्टंग की है
जावेद अख्तर और हनी ईरानी के बेटे ने पहली बार फिल्म में अभिनय किया है। फिर भी कहीं से नहीं लगता कि उनकी बतौर हीरो पहली फिल्म है। दिल चाहता है जैसी फिल्म बना चुके फरहान जानते हैं कि फिल्म कैसे बनाई और बनवाई जाती है।

गीत अनोखे
फिल्म के गीतों के बोल बडे़ अनोखे हैं। पहली बार सुनेंगे तो अजीब लगेंगे। एकदम अलग ही तरह की तुकबंदी की गई है, लेकिन रॉक एलबम के लिए एक रॉक स्टार कैसे गीत लिखेगा और कहानी के साथ देखेंगे तो निश्चित रूप से अच्छे लगेंगे।

शुक्रिया दोस्त
फिल्म की कहानी कभी आगे चलती है तो कभी फ्लैशबैक में लेकिन स्टोरी है जबरदस्त। सामान्य सी लगने वाली कहानी ने मुझे तो खासा प्रभावित किया। सौ रुपए से ज्यादा का टिकट पूरी फिल्म में कहीं नहीं कचोटता। हालाकि मेरे पैसे मेरे मित्र ने दिए।
सबसे खास
कुछ डायलॉग्स लिखना चाहता था पर समीक्षा इतनी बडी हो गई है कि शायद आपको मुझ पर गुस्सा आ जाए, इसलिए छोड़ दिए हैं। अपनी राय जरूर बताइयेगा।

6 comments:

डॉ .अनुराग said...

sahmat hun ....jhakas hai bhai.....

khurapatee said...

चलो अच्छा है. मै भी अब देख ही लेता हूँ. पर मुझे तो अभी मित्र की तलाश करनी होगी जो फ़िल्म दिखा दे, कोई तैयार हो तब न.

surendra kumar said...

राजीव जी बहुत सही कहा आप ने रॉक ऑन यानी जिंदगी दोबारा मौका नहीं देती.

Shastri said...

"कुछ डायलॉग्स लिखना चाहता था पर समीक्षा इतनी बडी हो गई है कि शायद आपको मुझ पर गुस्सा आ जाए, इसलिए छोड़ दिए हैं। अपनी राय जरूर बताइयेगा। "

डायलोग नहीं लिखा इसलिये गुस्सा आ रहा है!!



-- शास्त्री जे सी फिलिप

-- समय पर प्रोत्साहन मिले तो मिट्टी का घरोंदा भी आसमान छू सकता है. कृपया रोज कम से कम 10 हिन्दी चिट्ठों पर टिप्पणी कर उनको प्रोत्साहित करें!! (सारथी: http://www.Sarathi.info)

neelima sukhija arora said...

वाकई , कुछ और लोग भी कह रहे हैं कि फिल्म अच्छी है पर अब आपने मोहर लगा दी है तो लगता है फिल्म देखनी ही होगी।

दर्द-ए-दर्द said...

rajeev babu,
film ka paas aaya ho to dena.