Saturday, September 20, 2008

इससे, बचना ए हसीनो!



यशराज की नई फिल्म बचना हसीनो ( रिलीज हुए काफी समय हो गए, पर इसे मेरे लिए नई कह सकते हैं) कल ही डीवीडी पर देखी। फिल्म में कहानी है एक दिलफेंक युवा `राज´ यानी रणवीर कपूर के तीन अफेयर्स की।
पहली कहानी


18 साल का युवा `राज´ दोस्तों के साथ स्विट्जरलैंड टूर पर जाता है, वहां वह अपनी दिलफेंक अदा से ट्रेन छूट रही लड़की का साथ पाने के लिए अपनी ट्रेन भी मिस करता है। एक रात स्कूटी पर सफर करके अपने आखिरी स्टॉपेज तक पहुंचता है। इस बीच हिरोइन माही यानी मिनीषा लांबा से टाइमपास करता है। एयरपोर्ट पहुंचने पर 24 घंटे में जो कुछ होता है, वह अपने अंदाज में बीफ्र कर ही रहा होता है कि हिरोइन सुन लेती है। और उसे पता चलता है कि वह फ्रॉड है और सिर्फ टाइमपास कर रहा था। पहली कहानी उसके मन में प्यार के प्रति नफरत जन्म लेकर यहीं दम तोड़ देती है।
दूसरी कहानी


शुरू होती है मुंबई में बिपासा बसु के साथ। एक मल्टीनेशनल में सीनियर पॉजिशन वाला युवा राज इससे पहले तक किसी के साथ `लिव इन रिलेशनशिप´ में रहता है। काफी पैसे बचाने के बाद वह एक फ्लैट लेता है और वहां पड़ोसी राधिका यानी बिपाशा बशु से मिलता है। धीरे धीरे बातचीत होती है और वो बिना शादी ही एक साथ रहने लगता है(हमनें दोनो फ्लैट के बीच की दीवार गिरा दी, फिल्म का डायलॉग्), करीब साल भर बाद राज का ट्रांसफर हो जाता है और वह राधिका को सिडनी जाने की बात बताता है। राज की राजगिरी को राधिका इतने दिनों से प्यार समझ रही होती है और वह उसे शादी के लिए कहती है। राज सीधे मना नहीं कर पाता और अपने दोस्त से फामूüला पूछता है। फाइनली जिस दिन चर्च में शादी करनी होती है उस दिन सुबह ही राधिका को बिना बताए सिडनी चला जाता है। राधिका उसका चर्च में रात तक इंतजार करके चली जाती है और उधर हीरो नई सैटिंग की तैयारी में !
कहानी नंबर तीन


हीरो अंडरवीयर-बनियान में रोड पर बैंच पर बैठा होता है कि टैक्सी ड्राइवर तीसरी हीरोइन गायत्री यानी दीपिका पादुकोण आती है। वह सीधे पूछती है आप ऐसी ड्रेस पहनकर ही सड़क पर बैठे रहते हैं या कोई और बात है। इतने में ही ऊपर से एक लड़की कपड़े फेंकती है तो समझ में जाता है कि माजरा क्या था। थोड़ी गपशप के बाद पता चलता है कि वह बिजनेस स्कूल की स्टूडेंट है और जरूरत पूरा करने के लिए दिन में शॉप पर नौकरी और रात में टैक्सी चलाती है। पहली ही मुलाकात में वह बता देती है कि वह शादी में विश्वास नहीं करती और उसकी जिंदगी साथी के बिना ही ठीक है। हीरो भी अपनी जैसी मानकर उससे सैटिंग में लग जाता है।
एडिटर्स कट


अब तक मैं यही समझ रहा था कि इतनी शानदार फिल्में बनाने वाले बैनर यशराज की अक्ल पर क्या पत्थर पड़ गए हैं, जो युवाओं को प्रभावित करने वाली स्टोरी की बात कहकर ऐसी घटिया फिल्म बनाई है, जिससे हम निजी जिंदगी में कोई प्रेरणा नहीं ले सकते। प्रेरणा तो दूर कई जगह तो लड़कियां इतनी जल्दी सैट होने लगती हैं कि आपको कहानी ही फर्जी लगने लगती है।


हीरो चला गंगा नाहने


गायत्री से कुछ मुलाकातें होती हैं कि अब राज का हीरो वाला स्वरूप जागने लगता है कि उसने पहले वाली दो लड़कियों उसने धोखा दिया है। शायद यह पहली हिंदी फिल्म हो जिसमें हीरो खुद को कमीना और धोखेबाज कहते हुए स्वीकार करता हो। अब हीरो निकल पड़ता है प्रायश्चित करने और पहली हिरोइन माही के घर जाता है। वहां वह जैसे-तैसे उसे मनाने की कोशिश करता है पता चलता है कि धोखा खाई माही को अब प्यार में विश्वास नहीं है, यहां तक कि उसके दो बच्चे जरूर है, लेकिन उसने अपने पति से 15 साल में कभी रोमांस नहीं किया। बाद में राज के प्रवचन काम जाते हैं और वह माही को पति से प्यार करने की सलाह देकर जाता है। राज अपना दूसरा प्रायश्चित पूरा करने के लिए इटली जाता है, जहां उसकी पहली रूममेट राधिका (जो अब एक बड़ी मॉडल हो चुकी है) से क्षमा मांगता है। वह कई शर्तें रखती है और बाद में सुलह हो जाती है। इसके बाद हीरो सिडनी लौटता है। गायत्री प्यार का इजहार करती है और फिल्म की हैप्पी एंडिंग हो जाती है।


मेरी सलाह


इतनी अनैतिक और अजीब कहानी के बाद भी यह समझ से परे है कि फिल्म हिट कैसे हो गई। गाने बेशक अच्छे हैं, फिल्मांकन उससे भी सुंदर। तीन सुंदर हीरोइन है और एक लड़कियों का चहेता हीरो। मिनिषा कि ही çक्टंग ही थोड़ी कमजोर है, बिपाशा और दीपिका हॉट लग रही हैं। साथ में यशराज का बैनर, शायद इन्हीं सब ने फिल्म को हिट बनाया। यशराज की फिल्म समझकर अब उसे पारिवारिक मानना खतरे से खाली नहीं है। फिल्म में कई लिपलॉक हैं। बिपाशा ने तो मॉडल होने के नाते जितना अपना बदन çछपाया, उससे ज्यादा दिखाया है। फिल्म देखें सिर्फ कहानी पढ़कर काम चलाएं!




अगर आप भी कुछ राय रखते हों तो जरूर दें

5 comments:

Udan Tashtari said...

जो आदेश जनाब!! अब तो नहीं ही देखेंगे!!

परमजीत बाली said...

अच्छी जानकारी दी।आभार।

ranjan said...

फोकट में मिली (TV) पर तो देख लेगें... पैसा बर्बाद नहीं करेंगे.. आपकी सलाह मानेगें

Harinath said...

अरे यार फ़िल्म से सलाह लेने लगे तब तो गये कम से. हाँ मनोरंजन के लिहाज से पिक्चर मस्त है. बस इसी लिए हिट हो गयी. वैसे भी जो हॉट है वो हिट है.

Anonymous said...

हर व्यक्ति दो-ढाई घंटे सुकून की तलाश में फिल्म देखने जाता है। ऐसे में वह हकीकत के धरातल पर उतरकर यह नहीं देखता कि फिल्म में जो कुछ दिखाया जा रहा है, वह कितना सही है और कितना गलत। यूं भी अच्छे गाने और अच्छा फिल्मांकन ही फिल्म के पैसे वसूल करवा देते है। फिर कहीं और क्यों सोचें....
श्याम