
अखबार में नौकरी करते करते सात साल से ज्यादा हो गए। इसलिए रोज समाचार पत्रों पर विश्वसनीयता के लिए नए नए उदाहरणों से वाकिफ होते रहते हैं। पर अभी जो मैंने देखा उस पर शायद बीमा कंपनियों की पूरी की पूरी इमारत टिकी है।
बीमा कंपनियों की नींव है एजेंट और उनके सर्वेयर। एजेंट के काम और उनके सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर ही बीमा कंपनियां लाखों रुपए के बीमा कर लेती हैं।
अभी अपन छुटटी पर राजगढ (मेरा होम टाउन) में थे। शाम के वक्त एक दोस्त के घर जाना हुआ। बीमा कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटिव है। यूं तो अपन जब भी राजगढ होते हैं तो कई साल से अपना अडडा वहीं जमता है, पर कभी मेरा सामने वो काम करते नहीं मिला। इस बार गया तो वो काम कर रहा था, मैंने यूं ही कागज उठाए तो मैंने देखा कि उसने वाहनों के इंश्योरेंस में चैचिस नंबर का रिकॉर्ड एक अखबार का कॉर्नर फाडकर कर रखा है। मैंने सोचा शायद कोई पेपर नहीं मिला होगा इसलिए मजबूरी में यह किया गया है। मैंने दूसरी बीमा पॉलिसी के लिए जुटाए गए कागज उठाए तो देखा उसमें भी अखबार के कागज वाले हिस्से में ही चैचिस नंबर लिख रखे हैं। गौर से देखा तो एक खास बात थी, ये नंबर अखबार के नाम के साथ डेट वाले हिस्से के आसपास लिए गए हैं।
मैंने उत्सुकतावश यूं ही पूछ लिया कि यार ये क्या माजरा है। कोई और कागज नहीं मिलता क्या।
::तो भाई बोला यार हमारी तो नौकरी ही ऐसे चल रही है। इसका मतलब है कि अखबार की डेट तक गाडी सलामत थी और उसके बाद ही इंश्योरेंस किया गया है। मतलब जिस दिन सर्वेयर को अपना टयूर दिखाना है और जिस दिन में इंश्योरेंस फाइल करनी है उस दिन के अखबार का इस्तेमाल किया जाता है।
मैंने कहा यार गजब है।
तब मुझे लगा कि अखबार की एक डेटलाइन से बीमा का कारोबार कैसे चलता है।