Friday, March 28, 2008

अगर एयरपोर्ट ऐसे हैं तो बस स्‍टैंड क्‍या बुरे थे


आपकी दया से अपन अभी तक कभी प्‍लेन में नहीं बैठे। अपन का कोई सगा संबधी भी विदेश में नहीं रहता। हां एक दो दूर के मित्र हैं, जब से गए हैं तब से वो देश में लौटे ही नहीं। इसलिए कभी उनको लेने जा नहीं पाया। इसलिए अपन ने एयरपोर्ट बाहर से ही देखा। कभी अंदर घुसे भी नहीं।
पर अपन को आजकल बस स्‍टैंड से ज्‍यादा एयरपोर्ट की चिंता रहती है। बस और रेलगाडी की स्थिति तो सारी दुनिया को पता थी पर एयरपोर्ट की हकीकत का पता चला तो इज्‍जत पर बन आएगी। उसमें भी कम से कम ऐसे हादसे तो बस शर्तमुर्ग की तरह सिर रेत में घुसाना होगा। अब ये कल की ही बात है इंडियन सिलिकॉन वैली बेंगलूरु में किंगफिशर कंपनी का प्‍लेन हैदराबाद के लिए उड़ान भर रहा था। सामने रन-वे पर एक डॉगजी आ गए। विमान उडता इससे पहले ही कुत्‍ते से टकरा गया। विमान को मामूली चोट आई और दो या‍त्री घायल हो गए। मैंने जहां से खबर पढी वहां डॉगजी की तबीयत का कोई समाचार नहीं है। अगर कोई बेंगलूरु में संपर्क साध सकता है तो प्‍लीज उनका भी हाल पता करना।
खैर ये तो हुआ समाचार विश्‍लेषण टाइप का
अपने जयपुर एयरपोर्ट की हालत भी सिंधीकैंप बस स्‍टैंड से बहुत अच्‍छी नहीं है। अभी भास्‍कर जयपुर में छपी एक खबर में बताया कि कैसे दिन से रात तक एयरपोर्ट का हाल रहता है। इसमें साफ फोटो सहित बताया गया था कि रात में खाडी की फ़लाइट होती है। उनको बडी संख्‍या में लेने और छोडने वाले एयरपोर्ट परिसर में ही सोते हैं और सुबह करीब चार बजे चाय गर्म चाय की आवाजों के साथ लोगों को वहां से हटाकर एयरपोर्ट को एयरपोर्ट जैसा बनाने की कोशिश होती है।
अपन के मित्र और डीआरडीओ में साइंटिस्‍ट गौरव काम के सिलसिले में अक्‍सर हैदराबाद जाते हैं। उसका कहना है कि हैदराबाद का एयरपोर्ट की स्थिति कमोबेश बस स्‍टैंड जैसी है। टॉयलेट में तो यूरिनल्‍स की हालत इतनी खराब होती है कि सूसू तक नहीं निकलता।
अब बीडी के धंधे करने वाले खानदानी बिजनेसमैन अपन के प्रफुल पटेल भाई ने एयरपोर्टों को निजी हाथों में देने की तैयारी की तो क्‍या बुरा किया। जबरन हो हल्‍ला मचाया जा रहा है।
इंडियन एयरलाइंस की बूढी एयरहोस्‍टेस अब सुरेंद्र शर्मा के चुटकुलों की शोभा बढा रही हैं, शायद अगले कवि सम्‍मेलन में जाएं तो नामुराद कुत्‍ता भी जगह पा जाएगा।
आप भी कुछ समझ रहे हैं तो मुझे जरूर बताइयेगा
( फुट नोट– अपन किसी भी कंपनी से एयर टिकट नहीं चाहते, बस आप लोगों का ध्‍यान इस और पडे यही खूब। समीरलालजी की तरह विदेश में रहने वाले ब्‍लॉग मित्रों से क्षमा चाहता हूं कि उनके रहते हमने यह लिख दिया कि हमारा विदेश में कोई नहीं है। )

3 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

हाँ भाई, आखिर कर्ता तो एक जैसे ही हैं। एयरपोर्ट हुआ तो क्या हुआ।

neelima sukhija arora said...

वैसे जयपुर एयरपोर्ट आकर तो ऐसा ही लगता है कि सिंधी कैंप बस अड्डे पर ही खड़े हो, लेकिन मुम्बई का एयरपोर्ट आजकल काफी सुधरा है। कई साल पहले मुम्बई का एयरपोर्ट भी किसी गांव का बस अड्डा ही लगता था। काश जयपुर के भी हालत सुधरें।

ramesh said...

भई कई साल पहले क्या हम तो अब तक मुम्बई नहीं जा पाए. तो वहाँ के एअर पोर्ट का हल जानने का सवाल ही नही उठता. वैसे जयपुर एयर पोर्ट को तो हमने भी देख रखा है. सिन्धी कैम्प जैसा तो नही ही है. खैर अपनी अपनी नजर. वैसे अच्छा लिखा है.